कागज़ की नाव - सुरेंद्र मोहन पाठक | विक्रम की डायरी

विक्रम की डायरी: पहले पन्ने से अपने मोहपाश में बाँध देती है ‘कागज की नाव’

नीलेश ‘विक्रम’ हिंदी साहित्य और हिंदी सिनेमा में विशेष रूचि रखते है और इन विषयो पर अक्सर अपने विचार लिखा करते हैं। एक बुक जर्नल पर पढ़िए लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक के उपन्यास ‘कागज की नाव’ पर उनकी लिखी यह पाठकीय टिप्पणी:

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